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à¤à¤• नवजात शिशॠके शरीर में 0.2 लीटर खून होता है…
जरूरी नहीं है कि मां सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ है तो जनà¥à¤® लेने वाला बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हो। नवजात में à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की à¤à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ देखी जाती है। à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का तà¥à¤°à¤‚त इलाज करना पड़ता है, ताकि उसके शरीर में हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ सही सà¥à¤¤à¤° तक पहà¥à¤‚च जाà¤à¥¤ समय से इलाज नहीं होने पर इसका असर बचà¥à¤šà¥‡ के बà¥à¤°à¥‡à¤¨ पर पड़ता है और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में उसका आईकà¥à¤¯à¥‚ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है। छह से आठसपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक बचà¥à¤šà¥‡ में नया खून नहीं बनता। खून की कमी से बचà¥à¤šà¥‡ का विकास à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है। नवजात में खून की कमी के कई कारण हो सकते हैं। वैसे बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के बाद चिकितà¥à¤¸à¤• जांच से पता कर लेते हैं कि वह à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¿à¤• है या नहीं। गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ दिखने का वाला बचà¥à¤šà¤¾ सफेद या पीला दिखता है। इसका इलाज à¤à¥€ संà¤à¤µ है। सही समय पर पहचान और इलाज होने पर à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में परेशानी की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ नहीं रहती है।
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